Chandrayaan 2: विक्रम लैंडर का ISRO से संपर्क टूटा, आंकड़ों का विश्लेषण जारी
Chandrayaan
2: भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया, जब वह शनिवार
तड़के चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था. इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा
कि संपर्क उस समय टूटा, जब विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले
स्थान से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था. इसरो चीफ के सिवन ने कहा कि अभी
आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है. इस खबर से जहां इसरो के वैज्ञानिकों में
निराशा देखने को मिली, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के
वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आपने बहुत अच्छा काम किया है.
उन्होंने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और यह यात्रा जारी
रहेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "जब मिशन बड़ा होता है तो निराशा
से पार पाने का हिम्मत होना चाहिए |.
दरअसल, 48 दिन के महात्वाकांक्षी सफर की मंजिल तक पहुंचने से ठीक पहले
अचानक इसरो के कंट्रोल रूम में एक अजीब सी चुप्पी छा गई. जो आंखे कुछ देर
पहले बड़ी उत्सुकता से स्क्रीन पर मिशन चंद्रयान-2 के हर कदम को परख रही
थी, वो ठिठक गईं. चंद्रयान-2 का सफर आखिरी और बेहद चुनौतीपूर्ण हिस्से तक
पहुंच चुका था लेकिन ये इंतजार लंबा खिंचने लगा और इसरो की तरफ से औपचारिक
ऐलान कर दिया गया कि लैंडर विक्रम से सेंटर का संपर्क टूट चुका है.|चंद्रयान-2 के इस मिशन पर दुनिया भर की नजरें टिकी थीं और उसकी वजह ये थी कि भारत के वैज्ञानिकों ने चांद के सबसे मुश्किल हिस्से पर पहुंचने को अपना लक्ष्य बनाया था. मिशन के मुताबिक चंद्रयान- 2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना था. चांद के इस हिस्से पर सूरज की रोशनी बहुत कम पहुंचती है. इस वजह से लैंडर और रोवर के लिए सौर ऊर्जा हासिल कर पाना मुश्किल होगा.|
लैंडर विक्रम के साथ संपर्क टूटने की वजहों का अध्ययन विश्लेषण किया जाएगा. जिन चुनौतियों की वजह से इस मिशन को अब तक का सबसे कठिन मिशन माना जा रहा था. उससे निपटने के नए तरीके भी ढूंढे जाएंगे. इस लिहाज से चंद्रयान-2 का अभियान इस बेहद मुश्किल लक्ष्य की तरफ बढ़ने के लिए वैज्ञानिकों के अनुभव को और समृद्ध करने वाला साबित होगा.|


0 टिप्पणियाँ